पन्ना महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण अभियान कार्यक्रम अंतर्गत चिन्हित कुपोषित बच्चों के बेहतर उपचार और पुनर्वास की कार्यवाही की जा रही है। इस क्रम में देवेन्द्रनगर तहसील क्षेत्र के आदिवासी माता-पिता के बच्चे को आवश्यक उपचार एवं रक्तदान की बदौलत नया जीवन मिला। सुपरवाईजर लक्ष्मी पण्डोले ने रक्तदान कर बच्चे की जान बचाई। उल्लेखनीय है कि आंगनबाड़ी केन्द्र में मासिक वजन वृद्धि निगरानी अभियान के तहत 11 से 20 तारीख तक दस दिवसीय अभियान चलाया जाता है। वजन अभियान के दौरान बाहर रहकर मजदूरी करने वाले रामफल आदिवासी एवं उर्मिला आदिवासी के तीन वर्षीय पुत्र आदित्य का वजन एवं ऊंचाई निर्धारित मानक अनुसार नहीं पाया गया। इस स्थिति पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हीरा कुशवाहा बच्चे को लेकर जिला पुनर्वास केन्द्र पहंुची। इसके पहले भी गत जून माह में कार्यकर्ता द्वारा बच्चे को भर्ती कराया गया था, लेकिन माता-पिता द्वारा निर्धारित 14 दिवस तक बच्चे को केन्द्र पर नहीं रखा गया और इलाज के दौरान ही आंशिक रूप से स्वस्थ्य होने के बाद छुट्टी कराकर ले गए और ग्राम से पलायन पर चले गए।पलायन से घर वापसी पर कार्यकर्ता द्वारा 16 मार्च को एनआरसी में बच्चे का परीक्षण करवाया गया। चिकित्सक द्वारा बच्चे को गंभीर ऐनेमिक बताया गया और अतिशीघ्र ब्लड चढ़ाने की सलाह दी गई।

ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव ब्लड उपलब्ध न होने के कारण परिवार द्वारा काफी प्रयास किया गया, लेकिन व्यवस्था नहीं होने और बच्चे की हालत अतिगंभीर होने पर परियोजना अधिकारी अशोक विश्वकर्मा तत्काल पर्यवेक्षण के लिए लक्ष्मी पंडोले सेक्टर बराछ पर्यवेक्षक एवं टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान पर्यवेक्षक द्वारा रक्तदान की सहमति दी गई और ब्लड बैंक में ब्लड डोनेट कर मानवता की मिसाल पेश की, जिससे गरीब आदिवासी परिवार के बच्चे को नया जीवन मिल सका। वर्तमान में बच्चे का इलाज जिला चिकित्सालय पन्ना में जारी है।



