पन्ना जिले के शाहनगर में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) शाहनगर से महज 200 मीटर की दूरी पर शाहनगर बस स्टैंड के पास संचालित हो रहा एक निजी दवाखाना अब जांच के घेरे में आ सकता है।

जानकारी के मुताबिक यह बिना मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री और आवश्यक दस्तावेजों के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, शाहनगर बस स्टैंड के पास संचालित चाँसी दवाखाना में मरीजों का उपचार किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर जानकारी के अनुसार, क्लिनिक संचालक के पास मरीजों का इलाज करने के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और सरकारी नियमों के तहत जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि, हालांकि अभी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।इस मामले को और गंभीर बनाती है सामने आई एक तस्वीर, जिसमें एक बुजुर्ग महिला को टेबल पर लिटाकर ड्रिप चढ़ाई जाती दिखाई दे रही है। तस्वीर में उपचार के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

यदि यहां बिना योग्य चिकित्सक और निर्धारित चिकित्सा सुविधाओं के उपचार किया जा रहा है, तो यह मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इतना ही नहीं, दवाखाने के बाहर लगाए गए दीवार पर जानकारी के लिए बोर्ड पर बवासीर जैसी बीमारी के उपचार का दावा भी किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या संबंधित संचालक को इस प्रकार के उपचार की वैधानिक अनुमति और आवश्यक विशेषज्ञता प्राप्त है? आखिर किस आधार पर गंभीर बीमारियों के इलाज का दावा किया जा रहा है?सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, क्लिनिक के अंदर बड़ी मात्रा में दवाइयों का स्टॉक भी रखा गया है। यदि यह जानकारी सही है, तो दवाइयों के भंडारण, उनकी वैधता और मरीजों को दी जा रही दवाओं की गुणवत्ता की भी जांच आवश्यक है।
सबसे बड़ा सवाल – जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहनगर से महज 200 मीटर की दूरी पर यह दवाखाना संचालित है, तो अब तक स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस ओर क्यों नहीं पड़ी?क्या संबंधित क्लिनिक के दस्तावेजों, संचालक की योग्यता और उपचार की व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी? क्या मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग कोई ठोस कदम उठाएगा?फिलहाल क्षेत्रवासियों की नजर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या फिर ग्रामीण मरीजों की सुरक्षा इसी तरह सवालों के घेरे में बनी रहती है।



