
जबलपुर दर्पण ।“अंधेर नगरी,चौपट राजा”—यह कहावत तब चरितार्थ होती दिखाई देती है जब किसी सरकारी या सार्वजनिक संस्थान में वर्षों तक कथित रूप से पहचान और दस्तावेजों से जुड़ा गंभीर मामला सामने आने के बाद भी व्यवस्था को इसकी भनक तक नहीं लगती। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के जबलपुर मंडल से जुड़े एक कर्मचारी पर अपने ही जीवित सौतेले भाई की शैक्षणिक मार्कशीट और पहचान संबंधी दस्तावेजों का कथित रूप से उपयोग कर करीब 22 वर्ष पहले नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग,एलआईसी के सतर्कता विभाग तथा अन्य संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बाद मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, ग्राम मेक,गोटेगांव (जिला नरसिंहपुर) निवासी एलआईसी कर्मचारी शिव कुमार श्रीवास्तव ने वर्ष 2004 में कथित रूप से अपने भाई कैलाश कुमार श्रीवास्तव की शैक्षणिक मार्कशीट और अन्य दस्तावेजों का उपयोग कर नौकरी प्राप्त की। शिकायत में दावा किया गया है कि दोनों के पिता का नाम समान होने और पारिवारिक संबंधों के कारण कथित पहचान संबंधी गड़बड़ी वर्षों तक सामने नहीं आ सकी। हालांकि,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और मामले की जांच जारी है।
न्यायालय में कथित गलत शपथपत्र देने का भी आरोप- शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण प्रक्रिया के दौरान न्यायालय में प्रस्तुत शपथपत्र में भी कथित रूप से गलत जानकारी दी गई, जिससे वास्तविक पहचान छिपी रही। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिस भाई के दस्तावेजों के कथित उपयोग का आरोप है, उसकी वर्तमान आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और वह कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहा है।
आरटीआई में नहीं मिली जानकारी- शिकायतकर्ता का कहना है कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत नियुक्ति संबंधी दस्तावेज एवं न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति मांगी गई थी,लेकिन एलआईसी जबलपुर के जन सूचना अधिकारी ने 17 जून 2026 को इसे तृतीय पक्ष की जानकारी बताते हुए उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया।अंधेर नगरी,चौपट राजा! 22 साल तक ‘भाई’ बनकर नौकरी करने का आरोप, अब जागा विभाग
मुंबई सतर्कता विभाग और जबलपुर कार्यालय हुए सक्रिय- मामले की गंभीरता को देखते हुए एलआईसी के मुंबई स्थित सतर्कता विभाग ने 30 जून 2026 को शिकायतकर्ता से 15 दिनों के भीतर पहचान संबंधी पुष्टि एवं साक्ष्य मांगे। वहीं,एलआईसी जबलपुर कार्यालय ने 2 जुलाई 2026 को पत्र जारी कर शिकायतकर्ता को सात दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए,ताकि मामले की जांच आगे बढ़ाई जा सके। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने,कथित रूप से प्राप्त वेतन की वसूली करने तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
आज कल आए दिन अखबारों की सुर्खियां बन रहा है कि फर्जी योग्यता पर कई अधिकारी और कर्मचारी नौकरी कर रहे है वह भी एक नहीं तीन जगह! एक ऐसा ही मामला सामने आ रहा है देखते इस पर किसकी मेहरबानी होगी।
अब बन गए करोड़पति-मामले की चर्चाओं का बाजार जैसे गर्म होता जा रहा वहीं एक आवाज और उठ रही है, फर्जी योग्यता से बनाई हुई समत्ति की भी जांच होनी चाहिए साथ ही वसूली भी? लेकिन क्या ऐसा हो पाएगा ये वक्त ही बताएंगा।
महाप्रबंधक ने कहा— दोषी पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई- मामले में एलआईसी के महाप्रबंधक संजय दत्ता ने कहा कि “शिव कुमार श्रीवास्तव के दस्तावेजों की विभागीय जांच की जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शेष अगले अंक में विस्तार से…जबलपुर दर्पण की टीम



