जहाँ एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 5 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ,पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और माताओं के प्रति सम्मान तथा प्रेम प्रकट करना। हर नागरिक को अपनी मां या धरती मां के नाम पर देशभर में एक पेड़ माँ के नाम अभियान चल रहे है l और कटनी जिला मुखिया (कलेक्टर) खुद इस अभियान को लेकर पौधारोपण करवा रहे हैं l तो वहीं दूसरी ओर कटनी जिले के रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान को खुलेआम ठेंगा दिखा दिया है। अस्पताल परिसर में लगा लगभग 30 साल पुराना लगा कंजी का पेड़, जो मरीजों के लिए छांव का एकमात्र सहारा बना हुआ था, उस पर कुल्हाड़ी चला कटवा दिया गया ।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्षों पुराना पेड़ कटवाया जाना यह एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला है,जबकि जिला प्रशासन जहाँ हर पंचायत में माँ के नाम पर पेड़ लगाने के लिए ग्रामीणों को जागरूक कर रहा है, वहीं रीठी CHC प्रभारी प्रबंधन ने हरे-भरे पेड़ पर कुल्हाड़ी चलवा दी l जिसको लेकर लोगो मैं यह चर्चा का विषय बना हुआ हैl कि जब जिला मुखिया खुद एक-एक पेड़ बचाने की अपील कर रहे हैं l तो स्वास्थ्य विभाग को किसने लगभग वर्षो पुराना पेड़ काटने का अधिकार दिया,,? और विभागीय अधिकारी माँ समान पेड़ को क्यों काट रहे हैं,,,?जिस पेड़ की छांव में मरीज और उनके परिजन बैठकर राहत महसूस करते थे,

आज वहां सिर्फ खाली जगह नजर आ रही है। आखिर ऐसा क्या कारण था जिस पर पेड़ काटने की जरूरत पड़ी गई और क्या मरीजों की सुविधा का ध्यान रखा गया,,? यह तस्वीर स्वास्थ्य विभाग परिसर की हैं, जहां कभी एक विशाल पेड़ अपनी ठंडी छांव से मरीजों और उनके परिजनों को राहत दिया करता था। करीब तीन दशक पुराने इस पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर लोग बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर राहत की सांस लेते थे। तेज धूप में यही पेड़ उनके लिए सहारा बना हुआ था। लेकिन अब यह पेड़ यहां मौजूद नहीं है । पेड़ की कटाई के बाद चबूतरा तो है, मगर उसकी छांव गायब हो चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पेड़ काटने से पहले मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के बारे में विचार किया गया….?जबकि जिला मुखिया द्वारा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण का संदेश दिया जा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग परिसर में वर्षों पुराने पेड़ की कटाई कई सवाल खड़े कर रही है। एक ओर नए पौधे लगाने की अपील, तो दूसरी ओर वर्षों से लोगों को छांव देने वाले पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाना ,यह विरोधाभास चर्चा का विषय बना हुआ है। आज पुराने पेड़ न केवल पर्यावरण की धरोहर होते हैं, बल्कि उनसे लोगों की भावनाएं और यादें भी जुड़ी होती हैं।देश में किसी भी सरकारी या निजी विभाग के लिए हरे और पुराने पेड़ों को काटना इतना आसान नहीं है।

इसके लिए कड़े नियम बनाए गए हैं:वन विभाग की लिखित अनुमति और उचित सर्वे के कोई भी विभाग पेड़ नहीं काट सकता। नियमों के मुताबिक, यदि विकास या सुरक्षा के लिए 1 पेड़ काटा जाता है, तो उसके बदले कम से कम 10 नए पौधे लगाना अनिवार्य होता है l मरीजों और उनके परिजनों को छांव देने वाला यह पेड़ अब स्वास्थ्य विभाग परिसर में मौजूद नहीं है। पेड़ की कटाई के बाद यहां आने वाले लोगों को तेज धूप में बैठने की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अब देखना होगा कि विभाग यहां छांव की वैकल्पिक व्यवस्था करता है या नहीं। हालांकि पेड़ कटाई के पीछे विभाग की क्या वजह रही, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। यदि पेड़ किसी सुरक्षा या अन्य आवश्यक कारण से काटा गया है, तो विभाग को इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही परिसर में नए पौधे लगाकर मरीजों के लिए छांव की व्यवस्था करना भी जरूरी है।फिलहाल स्वास्थ्य विभाग परिसर में पुराने पेड़ की कटाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट – राहुल राज



