खमतरा में शराब और गांजे के खिलाफ ग्रामीणों का हल्लाबोल, जनपद अध्यक्ष, भाजपा प्रतिनिधि और सरपंच उतरे मैदान में; प्रशासन को 5 दिन का अल्टीमेटम
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के शाहनगर क्षेत्र में कथित अवैध शराब और गांजे की बिक्री का मुद्दा अब गरमाता नजर आ रहा है। ग्राम खमतरा में नशे के कारोबार पर रोक लगाने की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। महिलाओं और पुरुषों ने नारेबाजी करते हुए तहसील कार्यालय से थाना शाहनगर तक मार्च निकाला और प्रशासन को पांच दिन के भीतर ठोस कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दे दिया।इस विरोध प्रदर्शन में जनपद पंचायत शाहनगर के अध्यक्ष आशीष खरे, ग्राम पंचायत खमतरा की सरपंच कमला बाई, ध्रुव सिंह सहित ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सरपंचों की मौजूदगी ने मामले को और सुर्खियों में ला दिया है
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल जनपद पंचायत शाहनगर के अध्यक्ष आशीष खरे की मौजूदगी को लेकर उठ रहा है। भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधि के रूप में पहचाने जाने वाले आशीष खरे जब ग्रामीणों और सरपंचों के साथ अवैध नशे के खिलाफ आवाज उठाने सड़क पर उतरते हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है

सोमवार दोपहर शाहनगर के स्थानीय विश्राम गृह से विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई। यहां ग्रामीण एकत्रित हुए और गांव को नशामुक्त बनाने की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई। इसके बाद नारेबाजी करते हुए ग्रामीण तहसील कार्यालय पहुंचे, जहां नायब तहसीलदार के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, शाहनगर के नाम ज्ञापन सौंपा गया।ज्ञापन में ग्राम खमतरा में कथित तौर पर हो रही अवैध शराब और गांजे की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है और शिकायतों की वास्तविक स्थिति क्या है, यह संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष और जांच से ही स्पष्ट होगा।तहसील कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के बाद ग्रामीणों का हुजूम थाना शाहनगर पहुंचा। यहां भी नारेबाजी करते हुए ग्रामीणों ने कथित अवैध शराब और गांजे की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
ग्रामीणों ने थाना प्रभारी के नाम शिकायती आवेदन एएसआई रामकृष्ण पांडेय को सौंपा। इस दौरान थाना प्रभारी के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अवैध शराब के कारोबार से जुड़े मामले में कमीशन लेने जैसे आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है।लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? किसी भी अधिकारी पर लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करते। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस और प्रशासन शिकायतों की निष्पक्ष जांच करें और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

थाने में आवेदन सौंपने के बाद जनपद पंचायत शाहनगर के सभागार में बैठक आयोजित की गई। इसमें ग्रामीणों की मांगों और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।जनपद पंचायत अध्यक्ष आशीष खरे ने कहा कि ग्रामीण गांव को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से एकजुट हुए हैं। प्रशासन को कार्रवाई के लिए पांच दिन का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र के ग्रामीणों को एकजुट कर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
देश की राजनीति में सेवा, सुशासन और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन गांवों में यदि अवैध नशे की बिक्री को लेकर ग्रामीणों को सैकड़ों की संख्या में सड़क पर उतरकर ज्ञापन देना पड़े, तो स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।खमतरा का यह मामला केवल एक गांव की शिकायत तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि कथित अवैध कारोबार की जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और गांव में कानून व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।अब सबसे बड़ा सवाल यही है—पांच दिन के अल्टीमेटम के बाद प्रशासन क्या करेगा? क्या खमतरा में कथित अवैध शराब और गांजे की बिक्री पर प्रभावी रोक लगेगी, या ग्रामीणों को अपने हक के लिए फिर सड़क पर उतरना पड़ेगा?फिलहाल सबकी नजरें पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।



